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भगवान विश्वकर्मा – ब्रह्मांड के दिव्य शिल्पकार
भूमिका सनातन धर्म के विशाल देवमंडल में प्रत्येक देवता जीवन के किसी न किसी शाश्वत सिद्धांत का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनमें से भगवान विश्वकर्मा रचनात्मकता, अभियांत्रिकी (इंजीनियरिंग) और शिल्पकला के प्रतीक माने जाते हैं। देवशिल्पी कहलाने वाले विश्वकर्मा प्रथम अभियंता, मूर्तिकार और दिव्य शिल्पकार के रूप में पूजनीय हैं। विश्वकर्मा पूजा, जो प्रतिवर्ष कन्या संक्रांति को मनाई जाती है, केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं बल्कि मानव श्रम, कौशल और उन उपकरणों का उत्सव है, जिनसे सभ्यता कायम है। भगवान विश्वकर्मा कौन हैं? ऋग्वेद, महाभारत और पुराणों में भगवान विश्वकर्मा का वर्णन देवताओं के दिव्य शिल्पकार के रूप में किया गया है। उनका नाम ही बताता है – “विश्व” (संसार/ब्रह्मांड) और…
