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उत्सव से जुड़े लेख

आधी रात के समय फूलों से सजे काठ के पालने में विराजे बाल कृष्ण, चारों ओर जगमगाते दीये, गेंदे की मालाएं, माखन की मटकी और घर में प्रवेश करते नन्हे चरण-चिह्न।
उत्सव18 मिनट

कृष्ण जन्माष्टमी 2026: तिथि और पूजा

कृष्ण जन्माष्टमी 2026 शुक्रवार, 4 सितंबर को है। जानें निशिता पूजा मुहूर्त, व्रत-पारण के नियम, श्रीकृष्ण जन्म की कथा और इस मध्यरात्रि पर्व का गहरा अर्थ।

द सनातन वे
सूर्यास्त के समय मंदिर के प्रांगण में जलते पीतल दीप के पास खड़े राजा महाबली, केरल की बैकवाटर पर जाती सांप नौका को निहारते हुए; अग्रभूमि में पुष्पों का गोल पूक्कलम और दूर ताड़ के वृक्षों के पीछे मंदिर का गोपुरम।
उत्सव9 मिनट

ओणम का गहरा अर्थ: जब एक राजा की विरासत उत्सव बन गई

ओणम का गहरा अर्थ जानें — राजा महाबली और वामन अवतार की कथा, केरल की दस दिन की परंपराएं, और यह प्रिय पर्व आज भी हमें क्या सिखाता है।

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अक्षय तृतीया का सच्चा सनातन अर्थ
उत्सव5 मिनट

अक्षय तृतीया का सच्चा सनातन अर्थ: त्रेता युग का आरंभ और परशुराम जयंती

अक्षय तृतीया के कालजयी महत्व की खोज करें — त्रेता युग का आरंभ, परशुराम का जन्म, और शाश्वत पुण्य का ब्रह्मांडीय वरदान।

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भगवान विश्वकर्मा — ब्रह्मांड के दिव्य वास्तुकार

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भगवान विश्वकर्मा के बारे में जानें — सनातन धर्म के दिव्य शिल्पकार, उनकी अलौकिक रचनाएं और विश्वकर्मा पूजा का महत्व।

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