The Sanatan Way

उत्सव के लेख

नदी किनारे सिंह के साथ माँ दुर्गा की बंगाली प्रतिमा और सूर्यास्त में पुष्प अर्पित करती लाल किनारी वाली सफेद साड़ियों में महिलाएँ।
उत्सव7 मिनट

बिजया दशमी 2026: तारीख, सिंदूर खेला और दुर्गा विसर्जन

बिजया दशमी 2026 बंगाल में बुधवार, 21 अक्टूबर को है। बंगाल की तिथि दशहरे से अलग क्यों, देवी बरण और सिंदूर खेला, कोलकाता का दुर्गा विसर्जन, शुभो बिजया की परंपराएँ और FAQ।

अंशुल पात्रो
सूर्यास्त के समय दीपों से जगमगाती नदी के किनारे धनुष लिए भगवान श्रीराम का भक्तिपूर्ण चित्रण।
उत्सव10 मिनट

दशहरा 2026: तारीख, विजय मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

दशहरा / विजयादशमी 2026 मंगलवार, 20 अक्टूबर को है; बंगाल में 21 अक्टूबर। दिल्ली-कोलकाता के मुहूर्त, घर की सरल पूजा विधि, श्रीराम और माँ दुर्गा की कथाएँ, शमी पूजन, रावण दहन और FAQ।

अंशुल पात्रो
लाल-सुनहरी साड़ी में दस भुजाओं वाली माँ दुर्गा अपने सिंह के साथ सूर्योदय के समय नदी पर प्रकट, घाट की सीढ़ियों पर पीतल के पात्र से जल अर्पित कर तर्पण करता भक्त, पास में सफ़ेद काश के फूल और तट पर मंदिर।
उत्सव10 मिनट

महालया 2026: तिथि, अर्थ, तर्पण और माँ दुर्गा का स्वागत

महालया 2026 शनिवार, 10 अक्टूबर को है। कोलकाता के तर्पण और श्राद्ध मुहूर्त, महालया का अर्थ, महिषासुरमर्दिनी, घर पर सरल पालन और आगे के पर्व।

अंशुल पात्रो
रात में शहर की एक छत पर लाल-सुनहरी साड़ी पहने महिला चाँद की ओर सुनहरी छलनी उठाए हुए है; पास में जलते दीये वाली पीतल की पूजा थाली और लाल करवा रखा है, और साथ में करवा चौथ का शीर्षक लिखा है।
उत्सव29 मिनट

करवा चौथ 2026: तिथि, चांद निकलने का समय, व्रत कथा और पूजा विधि

करवा चौथ 2026 गुरुवार, 29 अक्टूबर को है। दिल्ली में चाँद रात 8:17 और गुरुग्राम में 8:18 बजे (IST) निकलेगा। जानें शहरवार समय, पूजा विधि, अर्घ्य और वीरवती की कथा।

अंशुल पात्रो
श्वेत तापस वस्त्रों में नंगे पाँव खड़ीं माँ ब्रह्मचारिणी का भक्तिचित्र: दाहिने हाथ में जपमाला, बाएँ में कमण्डल, पृष्ठभूमि में वन-आश्रम।
उत्सव6 मिनट

माँ ब्रह्मचारिणी, महान तपस्विनी: नवरात्रि का दूसरा स्वरूप (2026)

नवदुर्गा में द्वितीय माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा द्वितीया तिथि (12 अक्टूबर 2026) को होती है। हज़ार वर्षों की तपस्या की कथा, स्वरूप, पूजा विधि, मंत्र और भोग।

अंशुल पात्रो
बाघिन पर आरूढ़ दशभुजा माँ चंद्रघंटा का भक्तिचित्र: मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र, हाथों में शस्त्र व वरद-अभय मुद्राएँ।
उत्सव6 मिनट

माँ चंद्रघंटा, चंद्र-घंटा धारिणी: नवरात्रि का तीसरा स्वरूप (2026)

नवदुर्गा में तृतीय माँ चंद्रघंटा की पूजा तृतीया तिथि (13 अक्टूबर 2026) को होती है। मस्तक के चंद्र-घंटे का अर्थ, दशभुजा स्वरूप, पूजा विधि, मंत्र और भोग।

अंशुल पात्रो
गर्दभ पर आरूढ़ श्यामवर्णा माँ कालरात्रि का गरिमामय भक्तिचित्र: खुले केश, अभय-वरद मुद्रा में उठे हाथ, अंधकार में महकती रात की रानी।
उत्सव6 मिनट

माँ कालरात्रि, काल की रात्रि: नवरात्रि का सातवाँ स्वरूप (2026)

नवदुर्गा में सप्तम माँ कालरात्रि की पूजा सप्तमी तिथि (17 अक्टूबर 2026) को होती है। देवी का उग्रतम किंतु रक्षक रूप, और वे शुभंकरी क्यों कहलाती हैं: कथा, पूजा, मंत्र, भोग।

अंशुल पात्रो
सिंह पर आरूढ़ माँ कात्यायनी का भक्तिचित्र: बाएँ हाथों में चंद्रहास खड्ग व कमल, दाहिने हाथ अभय-वरद मुद्रा में।
उत्सव6 मिनट

माँ कात्यायनी, योद्धा देवी: नवरात्रि का छठा स्वरूप (2026)

नवदुर्गा में षष्ठ माँ कात्यायनी की पूजा षष्ठी तिथि (16 अक्टूबर 2026) को होती है। महिषासुर-वध हेतु कात्यायन ऋषि के आश्रम में प्रकट देवी: कथा, स्वरूप, पूजा विधि, मंत्र और भोग।

अंशुल पात्रो
सिंहिनी पर आरूढ़ अष्टभुजा माँ कूष्मांडा का भक्तिचित्र: सूर्य-सा तेजोमय प्रभामंडल, हाथों में अमृत-कलश, माला, गदा, चक्र आदि।
उत्सव6 मिनट

माँ कूष्मांडा, ब्रह्मांड की सृजनकर्त्री: नवरात्रि का चौथा स्वरूप (2026)

नवदुर्गा में चतुर्थ माँ कूष्मांडा की पूजा चतुर्थी तिथि (14 अक्टूबर 2026) को होती है। मुस्कान से ब्रह्मांड रचने वाली देवी की कथा, अष्टभुजा स्वरूप, पूजा विधि, मंत्र और भोग।

अंशुल पात्रो
श्वेत वृषभ पर श्वेतवस्त्रा माँ महागौरी का भक्तिचित्र: त्रिशूल व डमरू धारण किए, पूर्णिमा के चंद्र-सी दीप्तिमयी।
उत्सव7 मिनट

माँ महागौरी, परम उज्ज्वला: नवरात्रि का आठवाँ स्वरूप, दुर्गा अष्टमी (2026)

नवदुर्गा में अष्टम माँ महागौरी की पूजा अष्टमी (दुर्गा अष्टमी, 19 अक्टूबर 2026) को होती है। नवजीवन की कथा, कन्या पूजा, स्वरूप, पूजा विधि, मंत्र और भोग।

अंशुल पात्रो
श्वेत वृषभ पर विराजमान माँ शैलपुत्री का भक्तिचित्र: दाहिने हाथ में त्रिशूल, बाएँ में कमल, मस्तक पर अर्धचंद्र, पृष्ठभूमि में हिमालय।
उत्सव7 मिनट

माँ शैलपुत्री, पर्वतराज की पुत्री: नवरात्रि का पहला स्वरूप (2026)

नवदुर्गा में प्रथम माँ शैलपुत्री की पूजा प्रतिपदा तिथि (11 अक्टूबर 2026, घटस्थापना के दिन) को होती है। कथा, स्वरूप, पूजा विधि, मंत्र और भोग।

अंशुल पात्रो
कमल पर विराजमान माँ सिद्धिदात्री का भक्तिचित्र: हाथों में गदा, चक्र, कमल और शंख, पास में विश्राम करता सिंह।
उत्सव7 मिनट

माँ सिद्धिदात्री, सिद्धियों की दात्री: नवरात्रि का नौवाँ स्वरूप, महानवमी (2026)

नवदुर्गा में नवम माँ सिद्धिदात्री नवमी तिथि की देवी हैं: 2026 में 19–20 अक्टूबर, महानवमी 19 को। अर्धनारीश्वर कथा, अष्ट सिद्धियाँ, पूजा विधि, मंत्र और भोग।

अंशुल पात्रो
कमल पर विराजमान माँ स्कंदमाता का भक्तिचित्र: गोद में बाल स्कंद, ऊपर के हाथों में कमल, पास में सिंह।
उत्सव6 मिनट

माँ स्कंदमाता, स्कंद की माता: नवरात्रि का पाँचवाँ स्वरूप (2026)

नवदुर्गा में पंचम माँ स्कंदमाता की पूजा पंचमी तिथि (15 अक्टूबर 2026) को होती है। गोद में बाल स्कंद लिए कार्तिकेय की माता: कथा, स्वरूप, पूजा विधि, मंत्र और भोग।

अंशुल पात्रो
उत्सव से सजी वेदी पर विराजमान भगवान गणेश, चारों ओर गेंदे की मालाएं, जगमगाते पीतल के दीये और मोदक का भोग।
उत्सव15 मिनट

गणेश चतुर्थी: तिथि, महत्व और पूजा विधि

गणेश चतुर्थी 2027 शनिवार, 4 सितंबर को है। जानें गणेश जन्म की कथा, मोदक और दूर्वा का अर्थ, घर पर सरल पूजा विधि और पर्यावरण-अनुकूल विसर्जन के उपाय।

अंशुल पात्रो
आधी रात के समय फूलों से सजे काठ के पालने में विराजे बाल कृष्ण, चारों ओर जगमगाते दीये, गेंदे की मालाएं, माखन की मटकी और घर में प्रवेश करते नन्हे चरण-चिह्न।
उत्सव18 मिनट

कृष्ण जन्माष्टमी: तिथि और पूजा

कृष्ण जन्माष्टमी 2027 बुधवार, 25 अगस्त को है। जानें निशिता पूजा मुहूर्त, व्रत-पारण के नियम, श्रीकृष्ण जन्म की कथा और इस मध्यरात्रि पर्व का गहरा अर्थ।

अंशुल पात्रो
सूर्यास्त के समय मंदिर के प्रांगण में जलते पीतल दीप के पास खड़े राजा महाबली, केरल की बैकवाटर पर जाती सांप नौका को निहारते हुए; अग्रभूमि में पुष्पों का गोल पूक्कलम और दूर ताड़ के वृक्षों के पीछे मंदिर का गोपुरम।
उत्सव9 मिनट

ओणम का गहरा अर्थ: जब एक राजा की विरासत उत्सव बन गई

ओणम का गहरा अर्थ जानें: राजा महाबली और वामन अवतार की कथा, केरल की दस दिन की परंपराएं, और यह प्रिय पर्व आज भी हमें क्या सिखाता है।

अंशुल पात्रो
बहुदा यात्रा में श्री जगन्नाथ मंदिर के समक्ष बड़दांड पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के तीन भव्य रथ और उमड़ी भक्तों की भीड़
उत्सव11 मिनट

बहुदा यात्रा: भगवान जगन्नाथ की पवित्र वापसी यात्रा

बहुदा यात्रा 2027 गणना के अनुसार मंगलवार, 13 जुलाई को है। भगवान जगन्नाथ की गुंडिचा मंदिर से पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर तक वापसी, सुना बेश और नीलाद्रि बीजे जानें।

अंशुल पात्रो
पुरी रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के तीन पवित्र रथ
उत्सव10 मिनट

जगन्नाथ रथ यात्रा: महत्व, इतिहास, तीन रथ और पवित्र अनुष्ठान

जगन्नाथ रथ यात्रा 2027 सोमवार, 5 जुलाई को है। पुरी रथ यात्रा का आध्यात्मिक महत्व, तीन पवित्र रथ, प्रमुख अनुष्ठान और बहुदा यात्रा की संपूर्ण जानकारी पढ़ें।

अंशुल पात्रो
अक्षय तृतीया का सच्चा सनातन अर्थ
उत्सव5 मिनट

अक्षय तृतीया का सच्चा सनातन अर्थ: त्रेता युग का आरंभ और परशुराम जयंती

अक्षय तृतीया 2027 रविवार, 9 मई को है। इसके कालजयी महत्व की खोज करें: त्रेता युग का आरंभ, परशुराम का जन्म, और शाश्वत पुण्य का ब्रह्मांडीय वरदान।

अंशुल पात्रो

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